विश्व रक्षा प्रदर्शनी 2026 में भारत का दमखम
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विश्व रक्षा प्रदर्शनी 2026 में भारत पहली बार 400 वर्ग मीटर का पवेलियन स्थापित कर स्वदेशी रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन करेगा।
भारतीय रक्षा पीएसयू वैश्विक मंच पर टैंक, मिसाइल, रडार और गोला-बारूद जैसी उन्नत प्रणालियां प्रस्तुत करेंगी।
Delhi/ भारत वैश्विक रक्षा मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में एक और अहम कदम बढ़ाने जा रहा है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ 8 से 9 फरवरी 2026 तक सऊदी अरब में आयोजित होने वाली तीसरी विश्व रक्षा प्रदर्शनी (World Defense Show–2026) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत पहली बार एक भव्य पवेलियन के जरिए अपनी स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमताओं और तकनीकी ताकत का प्रदर्शन करेगा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल और पवेलियन का महत्व:
विश्व रक्षा प्रदर्शनी 2026 में भारत का पहला आधिकारिक पवेलियन 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा, जिसका उद्घाटन स्वयं रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ करेंगे। यह पवेलियन भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा पहल का जीवंत उदाहरण होगा। इसमें टैंक, तोप प्रणाली, मिसाइल, गोला-बारूद, रडार और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों को प्रदर्शित किया जाएगा।
भारतीय पवेलियन में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL), मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) जैसी प्रमुख रक्षा सार्वजनिक उपक्रम कंपनियां भाग लेंगी।
द्विपक्षीय बैठक और औद्योगिक सहयोग:
प्रदर्शनी के दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की सऊदी अरब के रक्षा नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इन बैठकों में रक्षा सहयोग, संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और औद्योगिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही, भारतीय प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ भी संवाद करेगा, जिससे रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक स्थिति:
विश्व रक्षा प्रदर्शनी एक द्विवार्षिक अंतरराष्ट्रीय आयोजन है, जिसमें 700 से अधिक प्रदर्शक और लगभग 400 आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी अपेक्षित है। यह मंच भारत के लिए केवल हथियार प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करता है।
निष्कर्ष:
डब्ल्यूडीएस 2026 में भारत की भागीदारी न केवल रक्षा निर्यात को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत को एक भरोसेमंद और सक्षम रक्षा विनिर्माण साझेदार के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।